ध्यान और तनाव

ध्यान और तनाव

आज चर्चा ध्यान और तनाव पर। सैकड़ों शोधों और अनुसंधानों से प्रमाणित है कि ध्यान मानसिक तनाव को कम करता है। इस बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं। फिर भी 'जर्नल ऑफ इंस्ट्रक्शनल साइकोलॉजी' की हालिया रिपोर्ट 'चिंता नहीं कीजिए चिंतन' के नतीजों का जिक्र करना जरूरी समझती हूं। उनके लिए खासतौर पर, जो भारतीय मेधा का उपहास करते हैं। रिपोर्ट दरअसल एक सर्वे पर आधारित है। सर्वे वेस्ट वर्जीनिया की 'कैंसर परमानेंट सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च' नामक संस्था ने 106 सेकेंडरी स्कूलों के छात्रों पर किया। इसमें विभिन्न वर्गों, जातियों व व्यवसायों से जुड़े छात्र शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि ध्यान करने वाले छात्रों में चिंता और अवसाद के लक्षणों में गिरावट आने के साथ मानसिक तनाव में 36 फीसदी कमी आई। साथ ही उनकी मानसिक ऊर्जा और कार्यक्षमता में भी खासा इजाफा आया।
ओर भी वहुतो शोध पर ध्यान का सकारात्मक प्रभाव नजर आया है।
हमे गर्व है कि भारत ने ही ध्यान की विधि ओर विज्ञान से विश्व को प्रथम परिचित करवाया था। योगीजन इसको ही मुक्ति का द्वार स्वरूप उपयोग करते थे जो अभी एक अति गोपनीय लुप्त विद्या के रुप में रह गया।

https://www.bmedreport.com/archives/31746

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राजा पेरुमल मक्का गये और वही ईस्लाम कबूल करे इसका कोई पुख्ता प्रमाण ईतिहासकारो के पास नही है। कुछ मुस्लिम लेखक के अनुसार मक्का से लौटते समय उनका देहांत होगया मरने से पहले उन्होंने एक खत के जरिए ईस्लाम कुबूल की बात अपने राज्य के अधिकारियो को भेजा और मस्जिद स्थापना की बात कही और बनाया गया केरल का पहला मस्जिद केवल एक खत के सहारे। कुछ हिन्दूयो को अब भी संदेह है राजा पेरुमल को काफिर समझकर मार दिया गया था फिर उनकी झूठी फरमान लेकर भारत में आये और मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाया गया। अलतकिया (छद्म मित्रता ) के सहारे इस्लाम की शुरुआत हो गई दक्षिण भारत के केरल में। हजारो हिन्दूयो का धर्म परिवर्तन कराया गया उसके बाद। ये सच्ची ईतिहास तोड़ मड़ोर कर राजा पेरुमल को वदनाम कर दिया जो जिंदा भारत बापस ही नही आ पाये।