सिन्धु घाटी के मापन पध्दति


सिंधु घाटी सभ्यता मे मापन पध्दति
हरप्पा  ओर मोहन जो दडो ये दोनो ही सिंधु घाटी के स्थान है| हडप्पा पंजाब प्रदेश के उस भाग मे है जो आजकल पाकिस्तान मे है,ओर
मोहन जो दडो सिन्ध मे सिन्धु नदी के किनारे कराची से २०० मील के उत्तर मे है|

इनही हडप्पा ओर मोहनजोदडो स्थानो पर कुछ ऐसे छोटे छोटे आयताकार पिण्ड मिले है,जो स्पष्टतया तौलने के बाट थे
चित्र क्रमांक १ मे सिंधु सभ्यता के तौलने को बाट देखे!
इनमे कुछ चिकने पत्थर के भी थे|इनमे से कुछ बाट बैलनाकार भी थे परन्तु अधिकाश चौकोर घनाकृति के थे| किसी बाट पर कुछ अंकित न था| हेमी(hemmy) ने इन बाटो पर सर्वप्रथम कार्य आरम्भ किया ओर इनहे तौला |

 मोहनजोदडो की बाटे की तौले तुलना सारणी के चित्र क्रमांक २ मे देखे इस सारणी से यह स्पष्ट है कि यदि "ग"(c) वर्ग छोड दिया जाय तो सब १,२,४,८,१६,३२,६४,१६०,२००,३२०,६४० ओर१६०० के अनुपात मे है| हमारा आज कल का सैर लगभग २ पौड या ९३३ ग्राम का है|इस प्रकरण मे N बाट का तौल लगभग ३/२ सेर या ३ पौंड की ठहरती है| मोहनजोदडो मे कुछ बांट ०.९८,२.०७,३.०३,३.९२,२४.५०,ओर ४७.३० ग्राम भी पाए गए है जो आपस मे १,२,३,४,२४ ओर ४८ के अनुपात मे थे इनके संकेताक्षर P,Q,R,S,T,U है| इसी तरह के बाट बैबिलोनिया,सूसा,हिला आदि जगह पाए गए है इससे ये भी साबित होता है कि प्राचीन भारत के अन्य सभ्यताओ से भी व्यापारिक सम्बन्ध थे|
मोहन जोदडो का मापदंड- मोहनजोदडो मे १९३१ मे शंख के एक टुकडे पर कुछ निशान लगे मिले| यह टुकडा ६.६२*०.६२ सेंटीमीटर माप का था| इसमे नौ समान्तर रेखाए खिची हुई थी| जिनके बीच की दूरी ०.२६४ इंच की दूरी थी| एक रेखा पर एक वृत भी खिचा है| पांच रेखाओ के बाद एक बडा बिन्दु भी है| वृत ओर बिन्दु का अन्तर आजकल के माप के हिसाब से १.३२ इंच का है| यह अनुमान लगाया जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता के समय इंच इतना बडा रहा होगा|
चित्र३ मे देखे
इन सब बातो से स्पष्ट है कि प्राचीन भारत मे मापन की उन्नत तकनीके भारत मे प्रचलित थी | यही पध्दितया धीरे धीरे अन्य देशो मे भी पहुची|
वन्दे मातरम्

#कृष्णप्रिया

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